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साइबर कानून के लाभ

Last Updated on: Apr 08, 2010 12:57 PM

साइबर कानून के लाभ

आईटी अधिनियम 2000 पुराने कानूनों को बदलने का प्रयास और साइबर अपराधों से निपटने के लिए तरीके प्रदान करता है। हमें ऐसे कानूनों की आवश्‍यकता है जिससे लोग क्रेडिट कार्ड के माध्यम से नेट पर दुरुपयोग के भय से मुक्‍त खरीद लेनदेन का प्रदर्शन कर सकते हैं। अधिनियम बहुवांछित कानूनी ढांचा प्रदान करने का प्रस्ताव करता है जिससे की जानकारी को कानूनी प्रभाव, वैधता या लागूकरण से वंचित नहीं रखा जाएगा, केवल उसी स्थिती में कि    पूरी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के रूप में होगी। 

लेनदेन में वृद्धि और संचार को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के माध्यम से, इस अधिनियम को स्वीकार करने, बनाने और डिजिटल स्वरूप में सरकारी दस्तावेजों के प्रतिधारण सरकारी विभागों को सशक्त बनाने का प्रयास है। इस अधिनियम ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डों की उत्पत्ति एवं प्रमाणीकरण/डिजिटल सिग्‍नेचर के माध्यम से एक कानूनी ढांचे का प्रस्ताव प्रस्‍तुत किया है।

  • ई-वाणिज्य के परिप्रेक्ष्य में भारत के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और उसके प्रावधानों के कई सकारात्मक पहलुओं का समावेश है। प्रथमत: ई-व्यवसायों के लिये इन प्रावधानों के निहितार्थ ईमेल अब हमारे देश में संचार का एक वैध और कानूनी स्‍वरूप होगा, जिसे कानून के न्‍यायलय में विधिवत प्रदर्शित एवं अनुमोदित रूप होगा किया जाएगा।
  • इस अधिनियम के द्वारा प्रदत्त कानूनी संसाधनों की मदद से कंपनियां अब इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स करने में सक्षम हो सकती हैं।
  • डिजिटल हस्ताक्षर को इस अधिनियम में कानूनी वैधता और अनुमोदन दिया गया है।
  • इस अधिनियम ने डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करने के प्राधिकरण के लिए प्रमाण पत्र देने के कारोबार में निगमित कंपनियों के प्रवेश के लिए अवसर खुले छोडे हैं।
  • यह अधिनियम अब सरकार को वेब पर ई-शासन अधिसूचना जारी करने की अनुमति देता है।
  • यह अधिनियम कंपनियों को किसी भी कार्यालय, अधिकार, मंडल या इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित एवं नियंत्रित एजेंसी के कोई भी फार्म, आवेदन या कोई भी अन्य दस्तावेज फाइल करने के लिए सक्षम बनाता है जो उपयुक्त सरकार द्वारा नियंत्रित हैं।
  • आईटी अधिनियम महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दों को भी संबोधित करता है, जो इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस अधिनियम ने सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षर की अवधारणा को एक कानूनी परिभाषा दी है जिसे सुरक्षा प्रक्रिया की एक प्रणाली के माध्यम से पारित कर दिये जाने की आवश्‍यकता होगी, सरकार द्वारा एक बाद की तारीख पर नियत किये गए अनुसार। 
  • इस आईटी अधिनियम 2000 के अंतर्गत, निगमित कंपनियों के लिये अब यदि उनके कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क को नुकसान होता है या प्रति डाटा में किसी को भी नुकसान पहुँचता है तो क़ानूनी उपाय करना संभव हो जाएगा। इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त उपाय मौद्रिक क्षतिपूर्ति के रूप में है जिसमें 1 करोड रुपये से अधिक राशी नहीं दी जाएगी।
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