साइबर कानून भारत में
Last Updated on:
Apr 08, 2010 12:57 PM
भारत में साइबर कानून क्यों?
जब इंटरनेट विकसित किया गया था, इंटरनेट के संस्थापक जनकों का कदाचित ही कोई अभिप्राय रहा होगा कि इंटरनेट सर्वव्यापी क्रांति में ही परिवर्तित कर दिया जाएगा जो आपराधिक गतिविधियों में प्रयोग किये जाने वाले साधन हो सकता है एवं जिसका नियमन आवश्यक होगा। आज, अनेक अप्रियताएँ साइबरस्पेस में हो रही हैं। इंटरनेट की अनाम प्रकृति के कारण, संभव है कि यह सुरक्षा संबधी आपराधिक गतिविधियों एवं गुप्तचर विभाग के लोगों के साथ इंटरनेट के इस पक्ष का दुरुपयोग करने में लिप्त होकर साइबरस्पेस में आपराधिक गतिविधियों को स्थिर करने के लिए प्रयासरत रहे। इसलिए भारत में साइबर कानून की आवश्यकता है।
साइबर कानून का महत्व क्या है?
साइबर कानून महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इंटरनेट, वर्ल्ड वाइड वेब और साइबरस्पेस से संबंधित लेनदेन के लगभग सभी पहलुओं और गतिविधियों को स्पर्श करता है। आरंभिक काल में ऐसा लग सकता है कि साइबर कानून एक अत्यंत ही तकनीकी क्षेत्र है और इसका साइबरस्पेस की अधिकतम गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं है, परंतु यथार्थ वास्तविकता यही है कि सत्य से अधिक कुछ भी नहीं हो सकता है। चाहे हम इसे स्वीकार करें या नहीं, साइबरस्पेस में हर क्रिया और प्रतिक्रिया का कुछ कानूनी और साइबर कानूनी दृष्टिकोण है।
क्या साइबर कानून मुझसे संबंधित है/मुझे साइबर कानून की चिंता करनी चाहिये?
हाँ, आपको साइबर कानून की चिंता करनी चाहिये। इंटरनेट के स्वरूप में परिवर्तन आ रहा है और इस नए माध्यम को मानव इतिहास में एक अंतिम विकसित माध्यम रूप में देखा जा रहा है, साइबरस्पेस में आपकी हर गतिविधि का एक साइबर कानूनी परिप्रेक्ष्य हो सकता है एवं होगा। अपने डोमेन नाम का पंजीकरण करने के समय से, आपकी वेब साइट की स्थापना के समय तक, अपने वेबसाइट को प्रोत्साहन देने के समय तक, ईमेल भेजने और प्राप्त करने के समय तक, निश्चित साइट से इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स/आर्थिक लेनदेन के आचरण के समय तक, हर समय, साइबर कानून के विभिन्न मुद्दों को भी समाविष्ट किया जा रहा है। आज आप इन मुद्दों से चिंतित नहीं हैं क्योंकि आपको लगता है कि वे आप से बहुत दूर हैं और आपकी साइबर गतिविधियों पर उनका प्रभाव नहीं है। परंतु अभी या बाद में, आपको अपने लाभ के लिये साइबर कानून का ध्यान रखने के लिये कमर कसनी होगी।
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